Sunday, January 8, 2012

एक एक साँस का हिसाब रखकर चलना पड़ता ही है..

एक -एक साँस का हिसाब रखकर चलना पड़ता ही है..
ठोकर खाकर कभी गिरना ,
कभी गिरकर संभलना पड़ता भी है
मेरे हिसाब से चले ज़िन्दगी, तो हमेशा ख़्वाबों में साथ रहूँ..
पर नींदों की इज्ज़त कम ना हो,
इसलिए हकीकत की गलियों में निकलना पड़ता ही है...||

जीने को तो एक पल में भी जी लेते है कई लोग .
पर मेरी ज़िन्दगी कागज़ का एक लम्हा नहीं ,
जो जी लो तो ख़त्म, 
जला दो तो भस्म...
ज़िन्दगी वो ठंडा बरसता सावन है,,
जो बाहों में लेकर झूमो,
होठों से लगाकर चूमो,
तो अपना अपना सा लगता है..
झरोंके बंद कर दूर रहने की कोशिश करो..
तो छीटें बनकर दामन पे दाग सा लगता है..||
हर वक़्त करवटें लेती रहती है ज़िन्दगी..
पर कुछ पल हमेशा मासूम और ताज़ा रहें
पत्ते पे सोयी ओस की नन्ही बूँद की तरह ,
इसलिए कभी कभी चलते वक़्त को थमना पड़ता ही है...||

एक छूटे तो दूजे के लिये भागो ,
इसी भागा-दौड़ में गुजर सकती है सारी उम्र..
पर ये चंद पलों के दिन,
ये चंद पलों की रातें.
ये उम्मीद बांधती कसमें...
ये हिम्मत तोडती बातें ...
....कहीं ख़त्म ना कर दे तुम्हारे एहसास की वो कशिश,
वो दिल में उमड़ता सच,मेरी साँसों की वो तपिश..
इसलिए..बस एक कसक की पहरेदारी करने के लिये...
तेरे साये को आँखों में लेकर रात भर जगना पड़ता ही है....||

लोग कहते है चलने वाले पा ही जाते है मंजिल को..
पर शायद ये बात नहीं समझाई किसी ने पगले से इस दिल को.
धड़कना है,मानता हूँ बेशक ये इसके काबिल है..
पर तुमको देखेगा तो ठेहेरेगा ,
ये भी इसकी जिद में शामिल है...
चाहूं तो खुदा से माँगूं तुझे और पा भी लूँ अभी 
पर अपनी ही चीज मांगकर उसके रुतबे को बड़ा ना कर बैठूं 
इसलिए दुआ करने में थोडा रुकना पड़ता ही है..||



सुलझाने से सुलझती है चीज़ें पता है मुझको,
वक़्त लेती है तो निखरती है चीज़ें पता है मुझको,,
मैं आज उल्झूंगा तो कल सुलझ भी जाऊँगा ,
मन की हर बात बिन कहे समझ भी जाऊँगा 
पर तेरे साथ मिला ये लम्हा ,
कहीं ख़त्म ना हो जाये तुझसे कह दूँ तो 
कहीं रात का ये पर्दा हट ना जायें
तेरी गेसुओं की ये गाँठ के दांव पेंच समझ लूँ तो 
इसलिए कभी कभी तेरी जुल्फों में जानबूझकर उलझना पड़ता ही है | 

ये दिन कभी ना थके,
वो रात कभी अपनी बारात लेकर ना आये 
तो भी ज़िन्दगी थमेगी नहीं..
पर चंद के घर कारोबार बंद ना हो..
उसे देखकर तेरा दीदार बंद ना हो 
इसलिए उस सूरज को भी ढलना पड़ता ही है...
एक एक साँस का हिसाब रखकर चलना पड़ता ही है..
कभी तुमको यादकर संभलना ,
और कभी इसी वजह से मचलना पड़ता ही है...
एक एक साँस का हिसाब रखकर चलना पड़ता ही है..

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